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Mahapadam Kalsarpa Dosh: कुंडली में कैसे लगता है महापद्म काल सर्प दोष , जानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Mahapadam Kalsarpa Dosh: इस समय मायावी ग्रह राहु मीन राशि में है। केतु कन्या राशि में है। राहु और केतु डेढ़ साल तक एक राशि में रहते हैं। इसके बाद वे राशि बदल लेते हैं। राहु और केतु दोनों ही वक्री चाल चलते हैं।

Mahapadam Kalsarpa Dosh

Mahapadam Kalsarpa Dosh: इस समय मायावी ग्रह राहु मीन राशि में है। केतु कन्या राशि में है। राहु और केतु डेढ़ साल तक एक राशि में रहते हैं। इसके बाद वे राशि बदल लेते हैं। राहु और केतु दोनों ही वक्री चाल चलते हैं। वक्री चाल चलते हुए दोनों ही अपनी राशि बदलेंगे। राहु मीन से कुंभ राशि में गोचर करेगा। वहीं, केतु कन्या से सिंह राशि में गोचर करेगा। राहु और केतु के राशि परिवर्तन से कन्या और मीन राशि के जातकों को मायावी ग्रह से मुक्ति मिलेगी। वहीं, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को मायावी ग्रह से दो-चार होना पड़ेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली में महापद्म काल सर्प दोष कब और कैसे लगता है? आइए  आपको इस बारे में सब बताते हैं 

महापद्म काल सर्प दोष के प्रभाव  (Mahapadam Kalsarpa Dosh Ke Prabhav)

काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अविवाहित लोगों की शादी देरी से होती है। कई मौकों पर आधी उम्र तक शादी नहीं हो पाती। आर्थिक परेशानियां भी रहती हैं। सरल शब्दों में कहें तो कर्ज की समस्या होती है। शादीशुदा लोगों को भी अपने वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार गलत संगति के कारण धन की हानि होती है।

 महापद्म काल सर्प दोष कब बनता है?   (Kab Banta Hai Mahapadam Kalsarpa Dosh)

जब मायावी ग्रह राहु और केतु के बीच सभी शुभ और अशुभ ग्रह मौजूद होते हैं तो काल सर्प दोष बनता है। वहीं महापद्म काल सर्प दोष तब बनता है जब मायावी ग्रह राहु छठे भाव में और केतु बारहवें भाव में होता है। इस दौरान राहु और केतु के बीच सभी शुभ और अशुभ ग्रह मौजूद होते हैं। महापद्म काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उपाय ( Upay)

ज्योतिषी महापद्म काल सर्प दोष से पीड़ित लोगों को दोष से मुक्ति पाने की सलाह देते हैं। महाकालेश्वर और त्र्यंबकेश्वर मंदिरों में इस दोष का निवारण किया जाता है। इसके अलावा समय के अभाव में आप स्थानीय प्राचीन शिव मंदिर में भी कालसर्प दोष का निवारण करवा सकते हैं।वहीं कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के लिए हर सोमवार को भगवान को काले तिल मिलाकर गंगाजल अर्पित करें।

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