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Devi Devta Ke Naam List: जानिए हिंदू देवी और देवताओं के नामों की सूची

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Devi Devta Ke Naam List:  गणना करने पर हिंदुओं के कुल 424 देवता और देवगणों के नाम मिलते हैं। वेदों के अनुसार प्रमुख 33 देवता हैं, 36 तुषित, 10 विश्वेदेवा, 12 साध्यदेव, 64 आभास्वर, 49 मरुत्, 220 महाराजिक मिलाकर कुल 424 देवता और देवगण हैं।

Know the list of names of Hindu Gods and Goddesses

Devi Devta Ke Naam List:  गणना करने पर हिंदुओं के कुल 424 देवता और देवगणों के नाम मिलते हैं। वेदों के अनुसार प्रमुख 33 देवता हैं, 36 तुषित, 10 विश्वेदेवा, 12 साध्यदेव, 64 आभास्वर, 49 मरुत्, 220 महाराजिक मिलाकर कुल 424 देवता और देवगण हैं। देवगण अर्थात देवताओं के गण, जो उनके लिए कार्य करते हैं। हालांकि गणों की संख्या अनंत है, लेकिन 3 देव के अलावा देवताओं की संख्या 33 ही है। इसके अलावा प्रमुख 10 आंगिरसदेव और 9 देवगणों की संख्या भी हैं। महाराजिकों की कहीं संख्या 236 तो कहीं 226 मिलती है।

आदित्य-विश्व-वसवस् तुषिताभास्वरानिलाः

महाराजिक-साध्याश् च रुद्राश् च गणदेवताः ॥10-नामलिङ्गानुशासनम्

रुद्रादित्या वसवो ये च साध्याविश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च॥

गंधर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घाावीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥॥11-22

एक : ब्रह्म (परमेश्वर) एकमेव ब्रह्म द्वितीय नास्ते। अर्थात वह ईश्वर एक ही दूसरा नहीं।

दो अश्विनी कुमार:- 1.नासत्य और 2.द्स्त्र। कुछ विद्वान इन्द्र और प्रजापति की जगह 2 अश्विनी कुमारों को रखते हैं। प्रजापति ही ब्रह्मा हैं। प्रमुख 21 प्रजापति हैं।

तीन देव:- ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

तीन देवी:- सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती।

सप्तमातृका: ब्राह्मणी- ब्रह्मा की पत्नी, महेश्वरी- शिव की पत्नी, कौमारी- कुमार की पत्नी, वैष्णवी- विष्णु की पत्नी, वाराही- वराह की पत्नी, इंद्राणी- इंद्र की पत्नी और चामुंडा या यमी- यम की पत्नी। इन्हें ही घृत मातृका भी कहते हैं।

सप्त ऋषि: प्रत्येक युग, कल्प और मन्वंतर में अलग अलग सप्त ऋषि हुए हैं। वर्तमान सप्तम वैवस्वत मन्वंतर में- कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज।

आठ वसु: आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष।

अष्ट नाग: अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक।

अष्ट विनायक: यूं तो गणेशजी ने 64 अवतार लिए हैं। लेकिन 12 अवतार प्रख्यात माने जाते हैं। उनमें भी आठ प्रमुख हैं। एकदंत, धूम्रवर्ण, लंबोदर, महोदर, वक्रतुंड, विकट, गजानन और विघ्नराज अवतार।

अष्ट भैरव: असितांग भैरव, रु-रु भैरव, चण्ड भैरव, क्रोधोन्मत्त भैरव, भयंकर भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव तथा संहार भैरव। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है।

अष्ट लक्ष्मी: लक्ष्मी के आठ रूप ये हैं- आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, भाग्य लक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।

अष्ट चिरंजीवि: अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्केंण्डेय ऋषि।

नवग्रह स्वामी: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु।

नौ दुर्गा: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।

दस महाविद्या: काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

दश दिक्पाल: उर्ध्व के ब्रह्मा, ईशान के शिव व ईश, पूर्व के इंद्र, आग्नेय के अग्नि या वह्रि, दक्षिण के यम, नैऋत्य के नऋति, पश्चिम के वरुण, वायव्य के वायु और मारुत, उत्तर के कुबेर और अधो के अनंत। षोडश लोकपाल भी होते हैं।

दश विश्वदेव: पुराणों में दस विश्वेदेवों को उल्लेख मिलता है जिनका अंतरिक्ष में एक अलग ही लोक है।

एकादश रुद्र: शम्भु, पिनाकी, गिरीश, स्थाणु, भर्ग, भव, सदाशिव, शिव, हर, शर्व और कपाली।

बारह आदित्य: अंशुमान, अर्यमन, इन्द्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु। यही 12 माह के नाम भी है।

बारह साध्यदेव: अनुमन्ता, प्राण, नर, वीर्य्य, यान, चित्ति, हय, नय, हंस, नारायण, प्रभव और विभु ये 12 साध्य देव हैं, जो दक्षपुत्री और धर्म की पत्नी साध्या से उत्पन्न हुए हैं। इनके नाम कहीं कहीं इस तरह भी मिलते हैं:- मनस, अनुमन्ता, विष्णु, मनु, नारायण, तापस, निधि, निमि, हंस, धर्म, विभु और प्रभु।

चौदह मनु: स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, सावर्णि, दक्षसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, धर्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, देवसावर्णि तथा इन्द्रसावर्णि। यही मन्वंतर के नाम भी है।

चौदह यम : यम, धर्मराज, मृत्यु, अंतक, वैवस्वत, काल, सर्वभूत- क्षय, उदुंबर, दघ्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त।

चौबीस अवतार : नारायण, हंस, यज्ञ, मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, नृसिंह, नारद, धन्वंतरि, सनतकुमार, दत्तात्रेय, कपिल, ऋषजभदेव, हयग्रीव, मोहिनी, हरि, प्रथु, राम, कृष्ण , व्यास, बुद्ध, कल्कि।

सत्ताई नक्षत्र के अधिपति : चैत्र मास में धाता, वैशाख में अर्यमा, ज्येष्ठ में मित्र, आषाढ़ में वरुण, श्रावण में इंद्र, भाद्रपद में विवस्वान, आश्विन में पूषा, कार्तिक में पर्जन्य, मार्गशीर्ष में अंशु, पौष में भग, माघ में त्वष्टा एवं फाल्गुन में विष्णु। इन नामों का स्मरण करते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है।

तीस तुषित: 30 देवताओं का एक ऐसा समूह है जिन्होंने अलग-अलग मन्वंतरों में जन्म लिया था। स्वारोचिष नामक द्वितीय मन्वंतर में देवतागण पर्वत और तुषित कहलाते थे। देवताओं का नरेश विपश्चिषत था और इस काल के सप्त ऋषि थे- उर्ज, स्तंभ, प्रज्ञ, दत्तोली, ऋषभ, निशाचर, अखरिवत, चैत्र, किम्पुरुष और दूसरे कई मनु के पुत्र थे।

उनपचास मरुतगण: मरुतगण देवता नहीं हैं, लेकिन वे देवताओं के सैनिक हैं। वेदों में इन्हें रुद्र और वृश्नि का पुत्र कहा गया है तो पुराणों में कश्यप और दिति का पुत्र माना गया है। मरुतों का एक संघ है जिसमें कुल 180 से अधिक मरुतगण सदस्य हैं, लेकिन उनमें 49 प्रमुख हैं। इनमें 7 सैन्य प्रमुख हैं। 7 मरुतों के नाम निम्न हैं- 1.आवह, 2.प्रवह, 3.संवह, 4.उद्वह, 5.विवह, 6.परिवह और 7.परावह। यह वायु के नाम भी है।

चौसठ अभास्वर : तमोलोक में 3 देवनिकाय हैं- अभास्वर, महाभास्वर और सत्यमहाभास्वर। ये देव भूत, इंद्रिय और अंत:करण को वश में रखते हैं।

अन्य देव- गणाधिपति गणेश, कार्तिकेय, धर्मराज, चित्रगुप्त, अर्यमा, हनुमान, भैरव, वन, अग्निदेव, कामदेव, चंद्र, यम, हिरण्यगर्भ, शनि, सोम, ऋभुः, ऋत, द्यौः, सूर्य, बृहस्पति, वाक, काल, अन्न, वनस्पति, पर्वत, धेनु, इन्द्राग्नि, सनकादि, गरूड़, अनंत (शेष), वासुकी, तक्षक, कार्कोटक, पिंगला, जय, विजय, मातरिश्वन्, त्रिप्रआप्त्य, अज एकपाद, आप, अहितर्बुध्न्य, अपांनपात, त्रिप, वामदेव, कुबेर, मातृक, मित्रावरुण, ईशान, चंद्रदेव, बुध, शनि आदि।

अन्य देवी- दुर्गा, सती-पार्वती, भैरवी, लक्ष्मी, सरस्वती, भैरवी, मनसा, विंध्यवासिनी, ज्वालादेवी, वैष्णोदेवी, यमी, पृथ्वी, पूषा, आपः सविता, उषा, औषधि, अरण्य, ऋतु त्वष्टा, सावित्री, गायत्री, श्री, भूदेवी, श्रद्धा, शचि, दिति, अदिति आदि।

आकाश के देवता अर्थात स्व: (स्वर्ग):- सूर्य, वरुण, मित्र, पूषन, विष्णु, उषा, अपांनपात, सविता, त्रिप, विंवस्वत, आदिंत्यगण, अश्विनद्वय आदि।

अंतरिक्ष के देवता अर्थात भूव: (अंतरिक्ष):- पर्जन्य, वायु, इंद्र, मरुत, रुद्र, मातरिश्वन्, त्रिप्रआप्त्य, अज एकपाद, आप, अहितर्बुध्न्य।

पृथ्वी के देवता अर्थात भू: (धरती):- पृथ्वी, उषा, अग्नि, सोम, बृहस्पति, नदियां (गंगा, नर्मदा आदि) आदि।

पाताल लोक के देवता- उक्त 3 लोक के अलावा पितृलोक और पाताल के भी देवता नियुक्त हैं। पितृलोक के श्रेष्ठ पितरों को न्यायदात्री समिति का सदस्य माना जाता है। पितरों के देवता अर्यमा हैं। पाताल के देवाता शेष और वासुकि हैं।

पितृलोक के देवता:- दिव्य पितर की जमात के सदस्यगण: अग्रिष्वात्त, बर्हिषद आज्यप, सोमेप, रश्मिप, उपदूत, आयन्तुन, श्राद्धभुक व नान्दीमुख ये 9 दिव्य पितर बताए गए हैं।

वैदिक देवता: अग्नि, वायु, इंद्र, वरुण, मित्र, मरुत, त्वष्टा, सोम, ऋभुः, द्यौः पृथ्वी, सूर्य (आदित्य), बृहस्पति, वाक, काल, अन्न, वनस्पति, पर्वत, पर्जन्य, धेनु, पूषा, आपः, सविता, उषा, औषधि, अरण्य, ऋतु, त्वष्टा, श्रद्धा आदि।

विद्याधर, यक्ष यक्षिणी, गंधर्व, अप्सरा, नायिकाएं, 64 योगियां, गुह्मक, 84 सिद्ध, 52 वीर, दैत्य, दानव, असुर, पिशाच और पिशाचिनियां, भूत और प्रेत और शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल को देव नहीं माना जाता है।

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