facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  festivals  why can auspicious works be done without auspicious time on akshaya tritiya 2025

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया पर क्यों बिना मुहूर्त के हो सकते हैं शुभ कार्य, जानिए इस तिथि का पौराणिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Akshaya Tritiya 2025: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया तिथि का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता।

Akshaya Tritiya:
Akshaya Tritiya 2025: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया तिथि का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता। इसलिए इसे अक्षया कहते हैं। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा। अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। इसी दिन यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं। इस तिथि के बारे में जानते हैं विस्तार से।

अबूझ मुहूर्त: वर्ष में साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त होते हैं। इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी कहते हैं। यानी इस दिन पूरे दिन ही मुहूर्त होते हैं। इसलिए इन दिनों में अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। इस साढ़े तीन दिनों में से एक है वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया। साढ़े तीन मुहूर्त अर्थात चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात गुड़ी पड़वा, अश्विन माह में दशहरा, अक्षय तृतीया और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। ये कुछ ऐसी तिथियां हैं जबकि मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है।
Akshaya Tritiya 2025

अक्षय तृतीया पर क्या कर सकते हैं?

1. इस दिन अविवाहित लोगों के लिए विवाह का अत्यंत शुभ मुहूर्त होता है। 
2. इस शुभ मुहूर्त में नूतन गृह प्रवेश, गृह निर्माण, दुकान अथवा प्रतिष्ठान का शुभारंभ कर सकते हैं। 
3. इस दिन नए आभूषण की खरीदी, नए व्यापार का आरंभ करना भी लाभदायक होता हैं।
4. अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ स्नान तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। अत: इस दिन यह कार्य अवश्य करें।
5. इस दिन भूमि, भवन और वाहन खरीदना भी शुभ होता है।
6. इस दिन पदभार ग्रहण करना भी शुभ होता है।
7. इस दिन स्नान, ध्यान, जप-तप करना, हवन करना, स्वाध्याय, पिंडदान और पितृ तर्पण करने से पुण्य मिलता है।
8. इस दिन महिलाएं अपने परिवार की समृद्धि के लिए व्रत करती हैं। 
9. अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
10. अक्षय तृतीया में सोना खरीदना बहुत शुभ माना गया है।
Akshaya Tritiya 2025

इस दिन का पौराणिक महत्व:

1. इस दिन विष्णु जी के नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था। 
2. इसी दिन ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म हुआ था। 
3. इसी दिन यक्षराज कुबेर को देवताओं से खजाना मिला था।
6. प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव जी ने 13 महीने का कठिन उपवास का पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया था।
4. एक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा का अवतरण भी हुआ था।
5. इसी दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे। 
7. इसी दिन सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ हुआ और द्वापर युग का समापन हुआ था।
8. इसी दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना प्रारंभ किया था। 
9. आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी।
10. इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी।
11. महाभारत के दौरान पांडवों के भगवान श्री कृष्ण से अक्षय पात्र लेने का उल्लेख आता है। 
Akshaya Tritiya 2025

अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न करें ये 6 कार्य:

1. इस दिन तामसिक भोजन के साथ-साथ मदिरा का भी सेवन नहीं करना चाहिए। रोग और शोक होता है।
6. इस दिन क्रोध, ईर्ष्या, कटु वचन या गृहकलह न करें। अशुभ घटनाएं घटती है।
4. इस दिन शरीर और घर को बिल्कुल भी गंदा नहीं रखना चाहिए क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा होती है।
2. इस दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए अन्यथा माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। 
3. अक्षय तृतीया के दिन भवन निर्माण प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
5. अक्षय तृतीया के दिन भूल से भी घर खाली हाथ वापस नहीं आना चाहिए अन्यथा बरकत चली जाती है।
Akshaya Tritiya 2025

अक्षय तृतीया पर करें 10 वस्तुओं का दान, मिलेगा पुण्य:

अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, जल का घड़ा, फल, इमली, गन्ना और वस्त्र वगैरह का दान अच्छा माना जाता है।
Akshaya Tritiya 2025

अक्षय तृतीया की कथा

प्राचीन काल में सदाचारी तथा देव-ब्राह्मणों में श्रद्धा रखने वाला धर्मदास नामक एक वैश्य था। उसका परिवार बहुत बड़ा था। इसलिए वह सदैव व्याकुल रहता था। उसने किसी से इस व्रत के माहात्म्य को सुना। कालांतर में जब यह पर्व आया तो उसने गंगा स्नान किया। विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की। गोले के लड्डू, पंखा, जल से भरे घड़े, जौ, गेहूं, नमक, सत्तू, दही, चावल, गुड़, सोना तथा वस्त्र आदि दिव्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान की। स्त्री के बार-बार मना करने, कुटुम्बजनों से चिंतित रहने तथा बुढ़ापे के कारण अनेक रोगों से पीड़ित होने पर भी वह अपने धर्म-कर्म और दान-पुण्य से विमुख न हुआ। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना अक्षय तृतीया के दान के प्रभाव से ही वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना। वैभव संपन्न होने पर भी उसकी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं हुई। अक्षय तृतीया के दिन इस कथा के श्रवण से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel