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Maa Kushmanda: नवरात्रि के चौथे दिन कैसे करें मां कूष्मांडा की पूजा? जानें, शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और भोग

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Maa Kushmanda: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। पूजा के लिए प्रातःकाल का समय शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त हर साल पंचांग के अनुसार बदलता है। 

Maa Kushmanda: 
Maa Kushmanda: शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा करने और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा किस विधि से करनी चाहिए, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और देवी को कौन-सा भोग लगाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है? आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, भोग और धार्मिक महत्व के बारे में।

मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब देवी ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। मां को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला जैसे अस्त्र-शस्त्र और वस्तुएं सुशोभित हैं। मां कूष्मांडा को ऊर्जा, आरोग्य और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।

मां कूष्मांडा पूजा का शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। पूजा के लिए प्रातःकाल का समय शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त हर साल पंचांग के अनुसार बदलता है। नवरात्रि 2026 में मां कूष्मांडा की पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त की सही जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग देखना चाहिए। यदि सुबह पूजा करना संभव न हो, तो भक्त अपनी सुविधानुसार दिन में स्वच्छ मन और श्रद्धा के साथ देवी की आराधना कर सकते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि

नवरात्रि के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले दीपक जलाएं और मां का ध्यान करें। देवी को लाल या पीले फूल, अक्षत, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद मां को फल, मिठाई और मालपुए का भोग लगाएं। मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, आरोग्य तथा समृद्धि की कामना करें। पूजा के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें।

मां कूष्मांडा का प्रिय भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन भक्त देवी को श्रद्धापूर्वक मालपुए अर्पित करते हैं। इसके अलावा मां को फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित किए जा सकते हैं। मां को भोग लगाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भोजन शुद्धता और स्वच्छता के साथ तैयार किया गया हो। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना और दूसरों में बांटना शुभ माना जाता है।

मां कूष्मांडा के पूजा मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करते समय उनके मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त देवी के ध्यान और आराधना के लिए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छितकामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥


इस मंत्र का जाप करते समय मां कूष्मांडा का ध्यान करें और उनसे जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य तथा सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने की प्रार्थना करें।

मां कूष्मांडा की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

मां कूष्मांडा की पूजा करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक देवी का स्मरण करें। पूजा स्थल पर साफ-सफाई बनाए रखें और देवी को सात्विक भोग अर्पित करें। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार करें। पूजा के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का स्मरण करना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, भक्ति और स्वच्छ मन से की गई प्रार्थना है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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