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Maha Ashtami: महाष्टमी की पूजा में क्यों जलाए जाते हैं 108 दीपक? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Maha Ashtami: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके करने की परंपरा है। दीपक की लौ को ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 

Maha Ashtami
Maha Ashtami: शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है और भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजन, हवन और दान जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। महाष्टमी के अवसर पर कई मंदिरों और घरों में दीपक जलाकर मां दुर्गा की आराधना भी की जाती है। इनमें 108 दीपक जलाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता रानी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महाष्टमी की पूजा में 108 दीपक ही क्यों जलाए जाते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और इसका महत्व।

108 दीपक जलाने का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में 108 की संख्या को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों में इस संख्या का विशेष स्थान है। इसी मान्यता के चलते कई भक्त महाष्टमी के दिन मां दुर्गा के सामने 108 दीपक जलाकर उनकी आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक प्रकाश, सकारात्मकता और अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है। मां दुर्गा के सामने दीपक जलाने से भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि, 108 दीपक जलाना हर परंपरा में अनिवार्य नहीं है।

108 संख्या को क्यों माना जाता है शुभ?

हिंदू धर्म में 108 संख्या का संबंध कई धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप अक्सर 108 मनकों वाली माला से किया जाता है। इसी तरह कई देवी-देवताओं के 108 नामों का पाठ करने की परंपरा भी प्रचलित है। मां दुर्गा के 108 नामों का स्मरण करके भक्त उनसे शक्ति, साहस और रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं। इसी धार्मिक भावना के साथ महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने को भी शुभ माना जाता है। भक्तों के लिए यह माता के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भक्ति प्रकट करने का एक माध्यम है।

मां दुर्गा की पूजा में दीपक का महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके करने की परंपरा है। दीपक की लौ को ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सामने अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है। महाष्टमी के दिन भक्त घी या तेल का दीपक जलाकर माता की आरती करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और प्रार्थना से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है। दीपक जलाते समय मां दुर्गा का ध्यान करना और उनके मंत्रों का जाप करना भी पूजा का हिस्सा हो सकता है।

महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने से क्या लाभ मिलता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाष्टमी पर मां दुर्गा के सामने 108 दीपक जलाने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसे घर में सुख-शांति बनाए रखने, परिवार की खुशहाली और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। कुछ भक्त इस अनुष्ठान को मनोकामना पूर्ति के लिए भी करते हैं। मां दुर्गा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है, इसलिए उनकी आराधना करते समय भक्त अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मांगते हैं। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाओं पर आधारित मान्यताएं हैं, इन्हें निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की विधि

महाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा या मां महागौरी की प्रतिमा अथवा तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। यदि आप 108 दीपक जलाना चाहते हैं, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार घी या तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें, दुर्गा चालीसा का पाठ करें या माता के 108 नामों का स्मरण करें। अंत में माता की आरती करके सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि वे पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर हों। सभी दीपकों को सुरक्षित तरीके से जलाएं और उन्हें बिना निगरानी के न छोड़ें।

क्या महाष्टमी पर 108 दीपक जलाना जरूरी है?

महाष्टमी पर 108 दीपक जलाना धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा एक अनुष्ठान है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के लिए इतने दीपक जलाना संभव नहीं है, तो वह एक दीपक जलाकर भी मां दुर्गा की पूजा कर सकता है। पूजा में दीपकों की संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के अनुसार आराधना करने को दिया जाता है। भक्त अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां महागौरी की पूजा कर सकते हैं।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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