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Chaitra Navratri 2025: मां महागौरी की पौराणिक कथा, कैसे हुआ रौद्र से गौरी रूप में परिवर्तन

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Chaitra Navratri 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आज चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। आज माता दु्र्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो जातक महागौरी की पूजा विधि-विधान से करते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Chaitra Navratri 2025
Chaitra Navratri 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आज चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। आज माता दु्र्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो जातक महागौरी की पूजा विधि-विधान से करते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही साथ माता रानी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार,मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की अलग-अलग गथाएं हैं। तो आज इस खबर में मां महागौरी की पौराणिक कथा के बारे में जानेंगे। तो आइए जानते हैं।

नवरात्रि अष्टमी हवन मुहूर्त 2025 

नवरात्रि की अष्टमी पर हवन का शुभ मुहूर्त 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।नवरात्रि की अष्टमी पर हवन का शुभ मुहूर्त 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।

मां महागौरी की कथा 

दूसरी कथा के अनुसार देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जिसके कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें स्वीकार करते हैं और शिव उनके शरीर को गंगाजल से धोते हैं, तब देवी अत्यंत गौरी हो जाती हैं और तभी से उनका नाम गौरी पड़ा। महागौरी के रूप में देवी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदंग स्वरूप दिखती हैं। देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देवता और ऋषिगण कहते हैं, "सर्वमंगल मांगल्ये शिवये सर्वध्या साधिके शरण्या अम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।"

मां महागौरी की दूसरी कथा 

देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी सती ने पार्वती के रूप में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। एक बार भगवान शिव ने पार्वती जी से कुछ ऐसा कह दिया जिससे उन्हें ठेस पहुंची और वे ध्यान में लीन हो गईं। इस प्रकार वर्षों तक कठोर तप करने के बाद भी जब पार्वती नहीं आईं तो भगवान शिव उन्हें खोजने निकले। वहां देवी पार्वती को देखकर भगवान शिव आश्चर्यचकित हो गए। पार्वती जी का रंग अत्यंत चमकीला था, उनका रंग चांदनी के समान श्वेत था, कुंद के फूल के समान निर्मल था, उनके वस्त्र और आभूषणों से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी उमा को गौर वर्ण का आशीर्वाद दिया।

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