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Bhadra Vishti Karana: अप्रैल में कब-कब रहेगा भद्रा का साय़ा, जानिए तिथि और समय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Bhadra Vishti Karana:  सनातन धर्म में भद्रा विष्टि करण को शुभ नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि की बहन हैं। भद्रा को उग्र स्वभाव का माना जाता है।

Bhadra Vishti Karana

Bhadra Vishti Karana:  सनातन धर्म में भद्रा विष्टि करण को शुभ नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि की बहन हैं। भद्रा को उग्र स्वभाव का माना जाता है। इसी कारण भद्रा विष्टि करण के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।मान्यता है कि इन कार्यों को करने से साधक शुभ फलों से वंचित रह जाता है और उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसका जीवन पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। आइए जानते  हैं कि अप्रैल माह में भद्रा विष्टि करण की तिथियां और समय के बारे में।

अप्रैल माह की भद्रा विष्टि करण की तिथियां और समय ( April Mah Me Kab Rahegi Bhadra) 


01 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण का योग शाम 04:12 बजे से 02 अप्रैल मध्यरात्रि 02:40 बजे तक है।

04 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण योग रात 08:13 बजे से 05 अप्रैल सुबह 07:45 बजे तक है।

08 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण योग सुबह 08:36 बजे से रात 09:21 बजे तक है।

12 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण योग सुबह 03:26 बजे से शाम 04:40 बजे तक है।

16 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण योग सुबह 12:11 बजे से दोपहर 01:16 बजे तक है।

19 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण योग शाम 06:25 बजे से 20 अप्रैल को सुबह 06:52 बजे तक है।

23 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण का योग सुबह 05:30 बजे से शाम 04:47 बजे तक है।

26 अप्रैल को भद्रा विष्टि करण का योग सुबह 08:32 बजे से शाम 06:41 बजे तक है।

भद्रा का अर्थ है शुभ कार्य करने वाली। ( Bhadra Ka Kya Arth)

भद्राकाल को समझने के लिए सबसे पहले हिंदू पंचांग के मुख्य भागों को समझना बहुत जरूरी है। हिंदू पंचांग में 5 मुख्य भाग होते हैं। ये मुख्य भाग तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण हैं। भद्रा का संबंध पंचांग से भी है। अगर भद्रा का शाब्दिक अर्थ समझें तो इसका अर्थ है शुभ कार्य करने वाली, लेकिन नाम के विपरीत भद्राकाल में शुभ कार्य करना वर्जित है।

भद्रा कौन है? ( Bhadra Kaun Hai)

भद्रा का जन्म एक कन्या के रूप में हुआ था। पौराणिक मान्यता है कि भद्रा सूर्य देव और उनकी पत्नी छत्र की पुत्री हैं। भद्रा शनि देव की पुत्री हैं। भद्रा का स्वभाव भी शनि देव की तरह बहुत क्रोधी है। भद्रा का जन्म राक्षसों के वध के उद्देश्य को पूरा करने के लिए हुआ था, लेकिन भद्रा के जन्म लेते ही वह देवताओं के शुभ कार्यों में बाधा डालने लगी। इससे दुखी होकर देवता ब्रह्माजी के पास पहुंचे, ब्रह्माजी को संसार का रचयिता माना जाता है।

भद्रा में क्या न करें? ( Bhadra Me Kya Na Kare)

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भद्रा विष्टि करण के दौरान गृह प्रवेश, शुभ व मांगलिक कार्य, मुंडन, विवाह और व्यापार आरंभ आदि जैसे काम करने से बचना चाहिए।

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