Ashtami Poojan:आकाशीय ग्रह मंडल में पांच ग्रहों का एक साथ होना यानी पंचग्रही योग उतार-चढ़ाव, उथल-पुथल की स्थिति उत्पन्न करता है, लेकिन सामूहिक रूप से पूजन सभी अरिष्टों का नाश करता है।

Ashtami Poojan: कर्म फल का इच्छुक प्राणी अपनी अभिलाषित वस्तुओं की प्राप्ति के लिए अत्यधिक व्यग्र मन से प्रतिपल प्रयत्न करता रहता है। जीवन का बहुत बड़ा भाग व्यग्र मन से की गई साधना में व्यतीत हो जाता है, तथापि सिद्धि और शांति नहीं मिल पाती। इसी अशांत चित्त को शांत कर जीवन में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, मनोकामना पूर्ति और साधना में सफलता के लिए पवित्र नवरात्र में अष्टमी का महापर्व है। विश्व में कोई ऐसी विभूति नहीं, जो नवरात्र की अष्टमी पूजन के द्वारा प्राप्त न हो सके। नवरात्र में महाअष्टमी के दिन महागौरी की उपासना का विधान है। मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है, इनकी शक्ति अमोघ और पुण्य फलदायिनी है। मां की कृपा के फलस्वरूप साधक का भाग्योदय होता है।
आकाशीय ग्रह मंडल में पांच ग्रहों का एक साथ होना यानी पंचग्रही योग उतार-चढ़ाव और उथल-पुथल की स्थिति उत्पन्न करता है, लेकिन सामूहिक रूप से पूजन सभी अरिष्टों का नाश करता है। मीन राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु इन सभी के प्रभाव से अप्रभावित रहने के लिए दुर्गाष्टमी पर हवन, पूजन, आराधना आवश्यक है। जब अलग-अलग स्थानों पर सभी देवी भक्त एक ही दिन, समय, मुहूर्त में एक साथ अपनी-अपनी पूजा, हवन, आराधना करते हैं, तो सबकी सम्मिलित सामूहिक पूजा, ब्रह्मांडीय विराट चेतना का रूप लेकर समस्त कुयोगों से देश, समाज और विश्व की रक्षा करती है।
नवरात्र की महाअष्टमी के दिन अगर भक्त के हृदय में सच्ची साधना की अभिलाषा विद्यमान हो, तो भगवती उसे जीवन के समस्त सुख-सुविधा प्रदान करती हैं। अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना ठीक उसी प्रकार कल्याणकारी है, जिस प्रकार अंधेरे में घिरे हुए संसार के लिए भगवान सूर्य की एक किरण। संपूर्ण नवरात्र में दुर्गाष्टमी और नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला भक्तजनों को मनोवांछित फल प्रदान करती है। परंपरा अनुसार अष्टमी अथवा नवमी के दिन कन्याओं का पूजन प्रायः हर जगह किया जाता है। अष्टमी का दिन नवरात्र का सबसे पवित्र शक्तिवर्द्धक दिन माना जाता है। इस दिन अगर कन्याओं को अपने हाथ से शृंगार किया जाए, तो देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
नवरात्र, नवशक्तियों से संयुक्त है। दुर्गा, गौरी, काली सब एक ही हैं। अष्टमी के दिन मां अन्नपूर्णा का पूजन भी किया जाता है। नवरात्र के आठवें दिन गौर वर्ण वाली महागौरी का स्तवन करने की परंपरा है। पूजा के समय देवी स्थान को तोरण और विविध प्रकार के मांगलिक पत्र-पुष्प से सजाना चाहिए और स्थापित सभी देवी-देवताओं का उनके नाम मंत्रों द्वारा षोडशोपचार पूजन करना चाहिए, यह विशेष फलदायक होता है। अष्टमी के दिन महागौरी को नारियल चढ़ाने से हर प्रकार की पीड़ा का शमन होता है। देवी भगवती का विधि-विधान से पूजन करने वाले सभी रोगों से मुक्त हो जाते हैं।
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