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64 Yogini Mantra: क्या है 64 योगिनी मंत्र का महत्व, जानिए किस प्रकार करें इन मंत्रों का जाप

जीवांजलि धार्मिक डेस्कPublished by:
कोमल
सार

64 Yogini Mantra: 64 योगिनी मंत्र तंत्र साधना में एक अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमय मंत्र है. ये मंत्र 64 योगिनियों को समर्पित हैं, जो माता काली के अवतार मानी जाती हैं. इन मंत्रों का जाप करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं

64 Yogini Mantra
64 Yogini Mantra: 64 योगिनी मंत्र तंत्र साधना में एक अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमय मंत्र है. ये मंत्र 64 योगिनियों को समर्पित हैं, जो माता काली के अवतार मानी जाती हैं. इन मंत्रों का जाप करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं, जैसे कि धन, यश, स्वास्थ्य और मोक्ष.

64 योगिनी कौन हैं?

64 योगिनियां माता काली के 64 रूप हैं. ये सभी योगिनियां अलौकिक शक्तियों से संपन्न हैं और इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा ही सफल हो पाते हैं.

64 योगिनी मंत्र का महत्व

शक्तिशाली सिद्धियां: इन मंत्रों का जाप करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं.
रक्षा: ये मंत्र भक्त को सभी प्रकार के संकटों से बचाते हैं.
मनोकामना पूर्णता: इन मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
आध्यात्मिक विकास: ये मंत्र आध्यात्मिक विकास में सहायक होते हैं.



64 योगिनी मंत्र का जाप कैसे करें?

शुद्धता: मंत्र जाप करने से पहले स्नान करके शुद्ध हो जाना चाहिए.
स्थान: मंत्र जाप के लिए शांत और साफ-सुथरा स्थान चुनें.
मूर्ति: 64 योगिनियों की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर जाप करें.
ध्यान: जाप करते समय 64 योगिनियों की शक्ति पर ध्यान केंद्रित करें.
संख्या: आप अपनी इच्छानुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं.

64 योगिनी मंत्र
(64 Yogini Mantra)

ॐ काली नित्य सिद्धमाता स्वाहा।

ॐ कपलिनी नागलक्ष्मी स्वाहा।

ॐ कुला देवी स्वर्णदेहा स्वाहा।

ॐ कुरुकुल्ला रसनाथा स्वाहा।

ॐ विरोधिनी विलासिनी स्वाहा।

ॐ विप्रचित्ता रक्तप्रिया स्वाहा।

ॐ उग्र रक्त भोग रूपा स्वाहा।

ॐ उग्रप्रभा शुक्रनाथा स्वाहा।

ॐ दीपा मुक्तिः रक्ता देहा स्वाहा।

ॐ नीला भुक्ति रक्त स्पर्शा स्वाहा।

ॐ घना महा जगदम्बा स्वाहा।

ॐ बलाका काम सेविता स्वाहा।

ॐ मातृ देवी आत्मविद्या स्वाहा।

ॐ मुद्रा पूर्णा रजतकृपा स्वाहा।

ॐ मिता तंत्र कौला दीक्षा स्वाहा।

ॐ महाकाली सिद्धेश्वरी स्वाहा।

ॐ कामेश्वरी सर्वशक्ति स्वाहा।

ॐ भगमालिनी तारिणी स्वाहा।

ॐ नित्यकलींना तंत्रार्पिता स्वाहा।

ॐ भैरुण्ड तत्त्व उत्तमा स्वाहा।

ॐ वह्निवासिनी शासिनि स्वाहा।

ॐ महवज्रेश्वरी रक्त देवी स्वाहा।

ॐ शिवदूती आदि शक्ति स्वाहा।

ॐ त्वरिता ऊर्ध्वरेतादा स्वाहा।

ॐ कुलसुंदरी कामिनी स्वाहा।

ॐ नीलपताका सिद्धिदा स्वाहा।

ॐ नित्य जनन स्वरूपिणी स्वाहा।

ॐ विजया देवी वसुदा स्वाहा।

ॐ सर्वमङ्गला तन्त्रदा स्वाहा।

ॐ ज्वालामालिनी नागिनी स्वाहा।

ॐ चित्रा देवी रक्तपुजा स्वाहा।

ॐ ललिता कन्या शुक्रदा स्वाहा।

ॐ डाकिनी मदसालिनी स्वाहा।

ॐ राकिनी पापराशिनी स्वाहा।

ॐ लाकिनी सर्वतन्त्रेसी स्वाहा।

ॐ काकिनी नागनार्तिकी स्वाहा।

ॐ शाकिनी मित्ररूपिणी स्वाहा।

ॐ हाकिनी मनोहारिणी स्वाहा।

ॐ तारा योग रक्ता पूर्णा स्वाहा।

ॐ षोडशी लतिका देवी स्वाहा।

ॐ भुवनेश्वरी मंत्रिणी स्वाहा।

ॐ छिन्नमस्ता योनिवेगा स्वाहा।

ॐ भैरवी सत्य सुकरिणी स्वाहा।

ॐ धूमावती कुण्डलिनी स्वाहा।

ॐ बगलामुखी गुरु मूर्ति स्वाहा।

ॐ मातंगी कांटा युवती स्वाहा।

ॐ कमला शुक्ल संस्थिता स्वाहा।

ॐ प्रकृति ब्रह्मेन्द्री देवी स्वाहा।

ॐ गायत्री नित्यचित्रिणी स्वाहा।

ॐ मोहिनी माता योगिनी स्वाहा।

ॐ सरस्वती स्वर्गदेवी स्वाहा।

ॐ अन्नपूर्णी शिवसंगी स्वाहा।

ॐ नारसिंही वामदेवी स्वाहा।

ॐ गंगा योनि स्वरूपिणी स्वाहा।

ॐ अपराजिता समाप्तिदा स्वाहा।

ॐ चामुंडा परि अंगनाथा स्वाहा।

ॐ वाराही सत्येकाकिनी स्वाहा।

ॐ कौमारी क्रिया शक्तिनि स्वाहा।

ॐ इन्द्राणी मुक्ति नियन्त्रिणी स्वाहा।

ॐ ब्रह्माणी आनन्दा मूर्ती स्वाहा।

ॐ वैष्णवी सत्य रूपिणी स्वाहा।

ॐ माहेश्वरी पराशक्ति स्वाहा।

ॐ लक्ष्मी मनोरमायोनि स्वाहा।

ॐ दुर्गा सच्चिदानंद स्वाहा।


 

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