Ramayana Mythological Story: रामायण में रावण को लंका का पराक्रमी राजा, महान विद्वान और शिवभक्त बताया गया है, जबकि कुबेर को देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन के देवता के रूप में जाना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन दोनों का संबंध केवल लंका तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वे आपस में सगे भाई थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण और कुबेर का जन्म एक ही पिता से हुआ था, किंतु उनकी माताएं अलग-अलग थीं। यही कारण है कि दोनों के स्वभाव, कर्म और जीवन की दिशा भी एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न रही।
रामायण और पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार कुबेर पहले लंका के राजा थे, लेकिन बाद में रावण ने बलपूर्वक उनसे लंका छीन ली। यही नहीं, रावण ने अपने ही बड़े भाई कुबेर का दिव्य पुष्पक विमान भी हड़प लिया था। आइए जानते हैं कि धन के देवता कुबेर और राक्षसराज रावण के बीच क्या संबंध था और कैसे दोनों भाइयों के बीच संघर्ष की कथा रामायण का महत्वपूर्ण प्रसंग बनी।
महर्षि विश्रवा के पुत्र थे कुबेर और रावण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि पुलस्त्य ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों में से एक थे। उन्हीं के पुत्र थे महर्षि विश्रवा, जो महान तपस्वी और विद्वान ऋषि माने जाते थे। महर्षि विश्रवा का पहला विवाह इलविला से हुआ था। इस विवाह से कुबेर का जन्म हुआ। कुबेर बचपन से ही धर्मनिष्ठ, तपस्वी और देवताओं के प्रिय थे। उन्होंने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और उनसे धन का अधिपति होने का वरदान प्राप्त किया। बाद में महर्षि विश्रवा का विवाह राक्षसराज सुमाली की पुत्री कैकसी से हुआ। कैकसी से रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म हुआ। इस प्रकार कुबेर और रावण एक ही पिता की संतान होने के कारण सौतेले भाई थे।
कैसे बने कुबेर धन के देवता?
कथा के अनुसार कुबेर ने वर्षों तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें अनेक दिव्य वरदान प्रदान किए। उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया गया और समस्त धन-संपत्ति का स्वामी होने का अधिकार मिला। ब्रह्मा जी ने कुबेर को उत्तर दिशा का दिक्पाल भी नियुक्त किया। इसी कारण उन्हें उत्तर दिशा का अधिपति माना जाता है।
कुबेर को अलकापुरी का स्वामी बनाया गया, जो हिमालय क्षेत्र में स्थित दिव्य नगरी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त उन्हें दिव्य पुष्पक विमान भी प्राप्त हुआ, जो इच्छानुसार आकाश में कहीं भी जा सकता था। कुबेर अपने तेज, वैभव और धर्मपालन के कारण देवताओं में विशेष सम्मान प्राप्त करते थे।
लंका पर कुबेर का शासन
रामायण और पुराणों के अनुसार स्वर्णमयी लंका का निर्माण दिव्य शिल्पी विश्वकर्मा ने किया था। प्रारंभ में यह नगरी राक्षसों के अधिकार में थी, लेकिन बाद में विभिन्न घटनाओं के कारण राक्षस पाताल लोक चले गए, तब महर्षि विश्रवा ने अपने पुत्र कुबेर को लंका में निवास करने की अनुमति दी।
कुबेर ने लंका को अपनी राजधानी बनाया और वहां धर्मपूर्वक शासन किया। उनके शासनकाल में लंका समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य का केंद्र बन गई थी। उस समय लंका में शांति और व्यवस्था थी तथा कुबेर अपने दिव्य पुष्पक विमान से विभिन्न लोकों की यात्रा किया करते थे।
राक्षसराज सुमाली ने रचा योजना
राक्षसों के राजा सुमाली को जब यह ज्ञात हुआ कि लंका पर कुबेर शासन कर रहे हैं, तब वह अत्यंत दुखी हुआ। वह चाहता था कि लंका पर पुनः राक्षसों का अधिकार स्थापित हो। इसी उद्देश्य से उसने अपनी पुत्री कैकसी का विवाह महर्षि विश्रवा से कराया, ताकि उनकी संतानें अत्यंत शक्तिशाली हों और भविष्य में लंका को पुनः प्राप्त कर सकें। समय बीतने पर रावण बड़ा हुआ। उसने वेदों और शास्त्रों का अध्ययन किया तथा कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से अनेक वरदान प्राप्त किए। वरदानों के कारण उसका बल और अभिमान दोनों बढ़ते गए।
रावण ने कैसे छीनी लंका?
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब रावण अत्यंत शक्तिशाली हो गया, तब उसके मन में लंका पर अधिकार करने की इच्छा जागृत हुई। उसने अपने नाना सुमाली और राक्षसों के परामर्श से लंका को अपना अधिकार क्षेत्र मानना प्रारंभ किया। रावण ने कुबेर के विरुद्ध अभियान चलाया और युद्ध के लिए चुनौती दी। कुछ कथाओं में वर्णन मिलता है कि महर्षि विश्रवा ने अनावश्यक संघर्ष से बचने के लिए कुबेर को लंका छोड़ देने का परामर्श दिया। इसके बाद कुबेर लंका छोड़कर कैलाश पर्वत के निकट अलकापुरी चले गए और रावण ने लंका पर अधिकार स्थापित कर लिया। तभी से रावण लंका का राजा कहलाया।
पुष्पक विमान पर भी रावण ने किया अधिकार
कुबेर के पास दिव्य पुष्पक विमान था, जिसे ब्रह्मा जी का वरदान माना जाता है। यह विमान इच्छानुसार चल सकता था और उसमें असंख्य यात्रियों के बैठने की क्षमता थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने केवल लंका ही नहीं छीनी, बल्कि अपने बड़े भाई कुबेर का पुष्पक विमान भी बलपूर्वक अपने अधिकार में ले लिया। इसके बाद रावण उसी विमान का उपयोग विभिन्न लोकों की यात्राओं में करने लगा। बाद में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया, तब यही पुष्पक विमान श्रीराम के अयोध्या लौटने का माध्यम बना।
कुबेर और रावण के स्वभाव में था बड़ा अंतर