विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  palak kishori ji says to what is the correct way to offer water to surya narayan

Palak Kishori Ji: सूर्य नारायण को जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है? पलक किशोरी जी ने बताया नियम

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
पलक किशोरी जी
सार

Surya Narayan Jal Arpan: नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने और जल की धारा के बीच से सूर्य दर्शन करने से आंखों की एकाग्रता बढ़ती है। इसके साथ ही व्यक्ति को मानसिक ताजगी का अनुभव होता है। 
 

Palak Kishori Ji
Spiritual Benefits of Sun Worship: भारतीय संस्कृति में सूर्य नारायण को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। पलक किशोरी जी बताती हैं कि सनातन परंपरा में प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य यानी जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सूर्य देव ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य और सकारात्मकता के स्रोत हैं। इसलिए सुबह के समय श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य नारायण को जल चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, उत्साह और मानसिक शक्ति का विकास होता है।

पलक किशोरी जी का मानना है कि सूर्य को जल अर्पित करने की शुरुआत सुबह जल्दी उठने से होती है। इसके लिए व्यक्ति को सूर्योदय से पहले जागना चाहिए और अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर शुद्ध मन से तैयार होना चाहिए। सुबह का समय वातावरण की शुद्धता और मानसिक शांति के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। जब हम दिन की शुरुआत जल्दी करते हैं तो शरीर और मन दोनों अधिक सक्रिय रहते हैं। यही आदत धीरे-धीरे जीवन में अनुशासन और नियमितता लाती है।

पहली किरण के समय दें जल

सूर्य नारायण को जल चढ़ाने का सबसे उत्तम समय वह माना जाता है जब सूर्य की पहली झलक दिखाई दे। जैसे ही सूर्य क्षितिज पर उगना शुरू करें और उनकी लालिमा आकाश में दिखाई देने लगे, उसी समय अर्घ्य देना चाहिए। यह समय प्रकृति के सबसे सुंदर और शांत क्षणों में से एक होता है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश अपेक्षाकृत कोमल होता है, जिससे उसे देखना भी सहज रहता है।

जल चढ़ाने का सही तरीका

अक्सर लोग सूर्य को जल तो चढ़ाते हैं, लेकिन उसके सही तरीके पर ध्यान नहीं देते हैं। कई बार लोग आंखें बंद करके अर्घ्य देते हैं, जबकि परंपरागत रूप से ऐसा नहीं माना गया है। सही विधि यह है कि दोनों हाथों से जल अर्पित करते समय सूर्य की ओर ध्यान रखा जाए। जब जल की धारा नीचे गिर रही हो, तब उस बहते हुए जल के बीच से सूर्य नारायण के दर्शन करने चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, एकाग्रता और ध्यान के साथ की जाती है। जब जल की पतली धारा के बीच से सूर्य दिखाई देते हैं, तब मन स्वतः शांत होता है और व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह वर्तमान में केंद्रित हो जाता है। यही एकाग्रता इस साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से क्या है महत्व

सूर्योदय के समय सूर्य का रंग लाल या नारंगी दिखाई देता है। इसके पीछे प्रकाश का वैज्ञानिक सिद्धांत काम करता है। सुबह और शाम के समय सूर्य की किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, इसलिए लाल रंग की किरणें अधिक दिखाई देती हैं। यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लालिमा लिए हुए नजर आते हैं। जब व्यक्ति जल की धारा के बीच से सूर्य को देखता है, तब पानी प्रकाश को एक विशेष तरीके से परावर्तित और अपवर्तित करता है। इससे सूर्य का प्रकाश अपेक्षाकृत कोमल रूप में आंखों तक पहुंचता है। यह अनुभव मन को शांति और ध्यान की अवस्था में ले जाने में सहायक माना जाता है।

नेत्र और मन पर सकारात्मक प्रभाव

मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने और जल की धारा के बीच से सूर्य दर्शन करने से आंखों की एकाग्रता बढ़ती है। इसके साथ ही व्यक्ति को मानसिक ताजगी का अनुभव होता है। सुबह की स्वच्छ हवा, शांत वातावरण और सूर्य के प्रकाश का संगम मन को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया को केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक दैनिक अनुशासन के रूप में भी देखा जाता है।

जीवन में अनुशासन और सकारात्मकता

सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पित करने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह व्यक्ति को नियमित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। रोज समय पर उठना, प्रकृति के साथ जुड़ना और कुछ क्षण ध्यानपूर्वक सूर्य का स्मरण करना मन में स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ाता है। धीरे-धीरे यह आदत व्यक्ति के स्वभाव में अनुशासन, सकारात्मक सोच और कार्य के प्रति समर्पण विकसित करती है।

जल चढ़ाने की परंपरा का महत्व

सूर्य नारायण को जल चढ़ाने की परंपरा श्रद्धा और विज्ञान दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सूर्योदय के समय सूर्य की पहली किरणों में अर्घ्य देना, बहते जल के बीच से सूर्य दर्शन करना और नियमित रूप से इस प्रक्रिया का पालन करना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, अनुशासन और मानसिक ऊर्जा का संचार करता है। यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने इस सरल लेकिन प्रभावशाली परंपरा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया।

ये भी पढ़ें -  घर में क्लेश और अशांति हो तो क्या करें, पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने बताया उपाय

ये भी देखें

Swami Avdheshanand Giri Ji Maharaj
स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज
18 July 2026
Rajan Ji Maharaj
श्री राजन जी महाराज
18 July 2026
Indresh Upadhyay Ji Maharaj
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज
17 July 2026
Sadhvi Krishnapriya ji
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
17 July 2026
Shivam Sadhak Ji Maharaj
नीरज के. पटेल
17 July 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel