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Adhik Jyeshtha Amavasya: अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर न करें ये गलतियां, जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Adhik Jyeshtha Amavasya: अधिक ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पितरों का तर्पण और भगवान की आराधना करते हैं।

Adhik Jyeshtha Amavasya

Adhik Jyeshtha Amavasya: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। जब ज्येष्ठ मास में अधिक मास का संयोग बनता है, तब आने वाली अधिक ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह तिथि पितरों के तर्पण, स्नान-दान, भगवान विष्णु और शिव की पूजा तथा पुण्य कर्मों के लिए शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों से विशेष फल प्राप्त होता है, वहीं कुछ कार्य ऐसे भी बताए गए हैं, जिन्हें अमावस्या के दिन करने से बचना चाहिए।

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पितरों का तर्पण और भगवान की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन कौन से कार्य करना शुभ माना गया है और किन गलतियों से बचने की सलाह दी जाती है।

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व

अधिक मास को सनातन धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दौरान आने वाली अमावस्या तिथि विशेष पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अमावस्या का दिन पितृ कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। इस दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से उनकी कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

ज्येष्ठ मास स्वयं भी तप, दान और जल से जुड़े पुण्य कार्यों का महीना माना जाता है। ऐसे में अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान, दान और पूजा-पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

 

Adhik Jyeshtha Amavasya

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर क्या करें?

पवित्र स्नान करें
अमावस्या तिथि पर प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने की भी परंपरा है।

पितरों का तर्पण करें
अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन तिल, जल और कुश के माध्यम से तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

दान-पुण्य करें
अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर जल से संबंधित वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों को जलपात्र, छाता, वस्त्र, अन्न, फल, तिल और दक्षिणा का दान किया जा सकता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए प्यासे लोगों को जल पिलाना भी पुण्यदायी माना जाता है।

भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें
अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा, मंत्र जाप और कथा श्रवण करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा भी की जाती है।

पीपल वृक्ष की पूजा करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष में देवताओं का वास माना जाता है। अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा, दीपदान और परिक्रमा करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार यह पूजा करते हैं।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
इस दिन विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु दिनभर भजन-कीर्तन और भगवान के नाम का स्मरण भी करते हैं।

 

Adhik Jyeshtha Amavasya

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर क्या न करें?

पितरों का अनादर न करें
अमावस्या को पितृ तिथि माना जाता है। इसलिए इस दिन पितरों का स्मरण करने के बजाय उनका अनादर करना या उनके निमित्त किए जाने वाले कर्मों की उपेक्षा करना उचित नहीं माना गया है।

क्रोध और विवाद से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन क्रोध, झगड़ा, कटु वचन और विवाद से दूर रहना चाहिए। इस दिन शांत और संयमित व्यवहार रखने की सलाह दी जाती है।

नशे और तामसिक भोजन से दूरी रखें
अमावस्या तिथि को सात्विकता का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन शराब, नशे और तामसिक भोजन के सेवन से बचने की परंपरा है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर फलाहार ग्रहण करते हैं।

किसी का अपमान न करें
धार्मिक दृष्टि से अमावस्या पर गरीब, बुजुर्ग, अतिथि, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करना अशुभ माना गया है। इस दिन सेवा और दान को अधिक महत्व दिया जाता है।

पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं
अधिकांश धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन अनावश्यक रूप से पेड़-पौधों को काटने या उन्हें नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से पीपल वृक्ष को पूजनीय माना जाता है।

शुभ कार्यों में जल्दबाजी न करें
कई परंपराओं में अमावस्या तिथि पर विवाह, गृहप्रवेश या अन्य बड़े मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।

अमावस्या के दिन दीपदान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की रात्रि में दीपदान करने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु घर के पूजा स्थल, मंदिर या पीपल वृक्ष के पास दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवताओं एवं पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

व्रत और पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या पर व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दिनभर सात्विक आचरण बनाना चाहिए। पूजा के समय स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें। तर्पण या दान करते समय भी नियमों और परंपराओं का पालन करना महत्वपूर्ण माना गया है।

अधिक ज्येष्ठ अमावस्या का दिन स्नान, दान, तर्पण और भगवान की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन धार्मिक कार्यों के साथ-साथ उन गलतियों से बचने पर भी जोर दिया जाता है जिन्हें शास्त्रों और परंपराओं में अनुचित बताया गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए धार्मिक कर्मों को इस तिथि पर विशेष महत्व दिया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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